गुरुवार, 4 जून 2009

अवगुणों को छोड़ गुणों पर ध्यान दें


आठ साल तक उनका प्रेम प्रसंग चला, और जब दोनों को लगने लगा कि दोनों एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते, तो जैसा कि ऐसे मामलों में होता है, दोनों ने घर वालों से विद्रोह कर शादी कर ली। शादी के चार साल बाद आज वही जोड़ी मेरे सामने बैठकर कह रही थी कि ‘हम एक साथ नहीं रह सकते।’ जाहिर है कि दोनों के पास शिकायतों के अपने-अपने और सही-गलत पुलिंदे थे, जिन्हें मेरे सामने पेश करने में उनमें होड़ लगी थी।
तंग आकर मैंने पहले लड़की से पूछा कि ‘आखिर, इस लड़के में तुमने ऐसा क्या देखा कि इसके साथ पूरी जिंदगी गुजारने का फैसला कर बैठी?’ उसने जवाब दिया कि ‘वह इंटेलीजेंट था।’ मैंने पूछा कि क्या तुम्हारा यह अनुमान बाद में गलत निकला?
वह थोड़ी घबराई, फिर उसने पूरे विश्वास के साथ कहा ‘नहीं, वह आज भी इंटेलीजेंट है।’ बस, उसके इस उत्तर ने मेरे हाथ में ब्रह्मास्त्र दे दिया और मैंने उसे चलाने में तनिक भी देरी नहीं की कि ‘जब वह आधार, वह नींव मौजूद है, जिस पर तुम्हारा प्रेम खड़ा था, तो अब प्रेम क्यों नहीं है।’
वे दोनों निरुत्तर हो गए। कुछ दिनों बाद लड़की ने अपने जन्मदिन पर फोन करके इस बात के लिए आशीर्वाद मांगा कि ‘हम दोनों में प्रेम और समझदारी यूं ही बनी रहे।’ दोस्तो, सभी में दोनों होते हैं। कुछ अच्छा-कुछ बुरा। जब तक ध्यान अच्छे पर रहता है, संबंध रहते हैं। जब ध्यान अच्छे से हटकर बुरे पर चला जाता है, संबंध चटकने लगते हैं। इस घटना के बाद मेरे जेहन में यह बात बैठ गई कि यदि किसी की एक कमी, एक गलत घटना हमें उससे हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर सकती है तो कोई एक गुण, एक अच्छी घटना हमें उससे हमेशा के लिए जोड़े भी रख सकती है।

3 टिप्‍पणियां:

  1. लेकिन आज तो हरेक को अपनी अपनी जगह चाहिये

    वैसे यदि आप वर्ड वेरिफिकेशन हटा लेंगें तो मुझ जैसे टिप्पणी देने वालों को आसानी होगी

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  2. हाँ, परन्तु गुणों की हम आशा करते ही हैं, अवगुणों की नहीं। सबमें बहुत से गुण होते हैं, खोजने भर की देर है।
    घुघूती बासूती

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